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जमीन सर्वे लेकर आपस में बढ़ रहा तनाव।

बिहार सरकार के द्वारा चल रहे सर्वे कार्य को लेकर हर जगह चर्चा चल रही है . सभी अपने बाप दादा का खतियान ढूढ़ने में लगे हैं और परेशान हैं.

सभी अपने अपने फेर में लगे हैं और उसमें सफलता भी पाते हैं विचौलियों के सहयोग से जिनकी सांठ गांठ विभाग के हर कर्मियों से है और कर्मियों के सहयोग से किसी का जमीन किसी को कर दिया गया है जिसके कारण आज सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है . कई लोग ऐसे भी मिलें हैं जिनके माता-पिता के नाम खतियान है और रशीद भी कट रहा है और उनका जमीन पटटिदार बेच चुका है, ऐसे लोग भी भटक रहे हैं जिनका जमीन तो जोत में है लेकिन रजिस्टर 2 से उस जमीन का जमाबंदी गायब है वो क्या करेंगे, ऐसी परिस्थिति को देखते हुए

जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को बहुत अच्छा निर्देश दिया है कि कार्यालय में जो बाहरी व्यक्ति या बिचौलिया सक्रिय रहते है.

अभियान चलाकर उनकी धर पकड़ की जाये लेकिन यह काम करेगा कौन, क्योंकि ये सक्रिय लोग भी तो इन्हीं के पाले हुए हैं हैं . चल रहे जमीन के सर्वे कार्य से लगभग लोग घुटन महसूस कर रहे हैं . लोगों का कहना है कि 1960 में जो सर्वे कराई गई वो आज तक सुलझ नहीं पाया है और अभी तक टाइटल का केश चल रहा है.

किसी का पुराना खतियान से नया खतियान पर जमीन कम कर दिया गया तो किसी का बढा दिया गया जिसके कारण लोग अदालत का चक्कर काट रहे हैं . इतना ही नहीं खतियान किसी के नाम से है और जमाबंदी किसी और के नाम पर है . इस तरह के एक नहीं बल्कि दर्जनों खामियां देखी जा रही है .

लोग इस सर्वे कार्य से खुश नहीं दिख रहे .

इस जमीन सर्वे का हो रहे कार्य आपसी कटुता को और बढा दिया है . इस सितम्बर माह के 15 तारीख तक का जो समय सीमा दिया गया प्रपत्र 2 एवं 3 भरकर जमा करने का . ये प्रपत्र है रैयत के वंशावली से लेकर जमीन के कागजात भरकर देने को . इस फौर्म को भरने में रैयतों को अनेकों परेशानियां हो रही है . किसी के पास रसीद नहीं है तो किसी के पास खतियान नहीं है . किसी एक फरीक ने रसीद कटा रखा है तो दुसरे का कट नहीं सकता और इधर रसीद की मांग की जाती है. इसी तरह खतियान किसी एक के पास है और दुसरा अगर डिजिटल खतियान जमा करता है तो उसका मान्य नहीं है. सर्वे कार्यालय से निकालने जाता है तो वहां लम्बी लाईन लगी है और ऊपर से मोटी रकम की मांग की जाती है जिसमें कमजोर लोग पीछे हट जाते हैं और उनका भविष्य अंधकार में दिखता है . सरकार को चाहिये था कि पहले इन रैयतों के परेशानियों को सुलझाने का . इन सब परेशानियों को लेकर आपसी कटुता सुलझने के बदले उलझते जा रहा है और विचौलिये आज भी अपने करतूतों से बाज नहीं आ रहे.

bharatdarshan24
Author: bharatdarshan24

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