Home » बिहार » विद्यालय में तालाबंदी के कारण शिक्षकों को भीषण ठंड में सड़क पर ही समय बिताना पड़ा।

विद्यालय में तालाबंदी के कारण शिक्षकों को भीषण ठंड में सड़क पर ही समय बिताना पड़ा।

गोरौल प्रखंड के नगर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया की भूमि दान  को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश दूसरे दिन भी जारी रहा. विद्यालय में तालाबंदी के कारण शिक्षकों को भीषण ठंड में सड़क पर ही समय बिताना पड़ा, जिसमें महिला शिक्षकों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.  वहीं ग्रामीण भी स्कूल गेट पर डटे रहे.  ठंड को देखते हुए नगर पंचायत की ओर से अलाव की व्यवस्था  भी नही की गई . विद्यालय की भूमि रजिस्ट्री में हो रही लगातार देरी ने एक बार फिर सुशासन सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.  ग्रामीणों का कहना है कि 20 अक्टूबर 2024 से उनकी एकमात्र मांग रही है कि लगभग 65 वर्ष पुराने इस सरकारी विद्यालय की जमीन सरकार के नाम पर रजिस्ट्री की जाए. जमीनदाता और ग्रामीण लगातार गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं. जनता में यह चर्चा आम है कि जहां आज लोग सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करते हैं, वहीं यहां आम लोग अपनी जमीन सरकार को देना चाहते हैं, फिर भी अधिकारी उदासीन बने हुए हैं. सवाल यह उठता है कि इतने लंबे समय से मामला लंबित रहने के बावजूद संबंधित पदाधिकारी अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यो नही की.  ज्ञातव्य हो  कि 21  मई 2025 में भी इसी मुद्दे पर विद्यालय में तालाबंदी हुई थी. उस समय तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द रजिस्ट्री कार्य पूरी कराने का भरोसा दिलाया था. इसके बाद सीओ से लेकर जिला पदाधिकारी तक का तबादला हो गया .  लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही. इस दौरान बरसात, गर्मी और सर्दी हर मौसम में छोटे-छोटे बच्चे किसी तरह पढ़ाई करते रहे. छात्रों की संख्या अधिक और कमरों की कमी के कारण शिक्षा विभाग को दो शिफ्ट में विद्यालय संचालन करना पड़ा  रहा है . कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई आम नागरिक अपनी जमीन महामहिम राज्यपाल के नाम निःशुल्क निबंधन करना चाहता है तो सबसे पहले जिला पदाधिकारी को लिखित सूचना देनी होती है।इसके बाद अंचल कार्यालय द्वारा भौतिक सत्यापन कर प्रतिवेदन डीसीएलआर,अनुमंडल पदाधिकारी होते हुए अपर समाहर्ता को भेजा जाता है.  सभी स्तरों से अनुमोदन के बाद अपर समाहर्ता जिला पदाधिकारी को निःशुल्क रजिस्ट्री का प्रस्ताव भेजते हैं.  जिसके बाद निबंधन अधिकारी को आदेश दिया जाता है.  इस प्रकरण में ग्रामीणों और जमीनदाताओं का आरोप है कि अधिकारियों की सुस्ती और उदासीनता के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. कभी अंचल अधिकारी सुनवाई नहीं करते, तो कभी जिला स्तर के वरीय अधिकारी मामले को नजरअंदाज कर देते हैं.  बताया गया कि 6 दिसंबर 2025 को जिला प्रशासन द्वारा मांगे गए सभी प्रतिवेदन भेज दिए गए थे, फिर भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया.
थक-हारकर ग्रामीणों ने 2 जनवरी 2026 को पुनः विद्यालय में तालाबंदी कर दी. मामला गरमाते देख   अधिकारियों की नींद तो खुली, लेकिन प्रक्रिया फिर वहीं आकर अटक गई. नए प्रतिवेदन की मांग शुरू हो गई. अब जब पूर्ण कागजात पर अंचल अधिकारी गोरौल के हस्ताक्षर की आवश्यकता पड़ी तो पता चला कि गोरौल सीओ का प्रभार चेहराकला सीओ के पास है, जो अवकाश पर हैं.  इसी कारण कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है. हालांकि  गोरौल सीओ के प्रभार में आर ओ है ,लेकिन उन्हें इस मामले से कुछ लेना देना नही है. इन तमाम परिस्थितियों के बीच ग्रामीण सवाल कर रहे हैं हमारी क्या गलती है? हमारे बच्चों की क्या गलती है?ग्रामीणों का कहना है कि  पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री बिहार और प्रधानमंत्री भारत सरकार तक पहुंचा दी गयी  है,फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ. अब कहा शिकायत करे,ताकि समस्या का समाधान हो. ग्रामीण अपने फैसले पर अडिग हैं कि जब तक विद्यालय की जमीन सरकार के नाम रजिस्ट्री नहीं होती, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा. उनका साफ कहना है कि यदि विद्यालय आमजन की जमीन पर है तो सरकार उसे खाली कर दे.
हमारे क्षेत्र के बच्चे नही पढ़ेंगे.
      प्रभारी अंचलाधिकारी सह राजस्व पदाधिकारी दिव्या चंचल ने बताई की हम अभी नये है. इस मामले की जानकारी मुझे नही है. रिपोर्ट जाहिद वारसी

bharatdarshan24
Author: bharatdarshan24

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share This