गोरौल प्रखंड क्षेत्र के गोरौल नगर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया बदहाल स्थिति के कारण बच्चों का न केवल शिक्षा बल्कि उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है. इसी बदहाली को दूर करने के उद्देश्य से आंदोलन बच्चों के अभिभावक और ग्रामीण छठे दिन भी विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर तालाबंदी करके विद्यालय के बाहर डटे हुए हैं. बीते 15 महीने से प्रशासनिक उदासीनता से उपजी यह विद्यालय बचाओ आंदोलन अब अधिकारियों के मनमाने रवैए के कारण उग्रता की ओर बढ़ रहा है. विद्यालय के गेट में ताला लगा कर बैठे अभिभावक को और ग्रामीणों से शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन का संवादहीनता
उकसावे की कार्रवाई जैसी है. विद्यालय को दान की हुई लगभग 41 डिसमिल जमीन का निःशुल्क निबंध प्रकरण के कारण तालाबंद विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार और सभी शिक्षकों का स्थिति और खराब है. विभाग को उनकी कोई चिंता नहीं है . इन शिक्षकों की स्थिति देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि जिस प्रकार जमीन विद्यालय की नहीं है. उसी प्रकार शिक्षक भी विभाग के नहीं है. विद्यालय से प्रखंड संसाधन केंद्र गोरौल की दूरी लगभग 2 किलोमीटर भी नहीं होगी. फिर भी कोई भी कार्यालय कर्मी या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपने शिक्षकों का हाल-चाल जानने का भी प्रयास करना उचित नहीं समझ रहे हैं. भगवान भरोसे चलते रहने की आदत शिक्षा विभाग को पहले से ही है, लेकिन इन्हीं शिक्षकों की मेहनत से प्राप्त उपलब्धियां को लपकने में विभाग कभी भी पीछे नहीं रहता है. वर्तमान में बंद विद्यालय के बाहर सड़क किनारे विद्यालय का कार्यालय चल रहा है. खुले में शिक्षक पूरा दिन बिताने को मजबूर है. दोपहर का भोजन सड़क पर ही शिक्षक कर रहै है. महिला शिक्षकों की परेशानी को कौन समझेगा. पिछले 6 दिनों से खुले आसमान में सर्द हवाओं के बीच रहने के कारण शिक्षकों की तबीयत भी खराब हो रही है. पहले से ही बीमार शिक्षक मनोज झा की तबियत अचानक बिगड़ गई जिसके कारन डॉक्टर को बुलाने तक की नौबत आ गई. मालूम हो कि अत्यधिक ठंड के कारण बच्चों के लिए विद्यालय को बंद रखा गया है. इस बीच गोरौल अंचल के कर्मियों के द्वारा विद्यालय पहुंचकर विद्यालय के जमीन का अवलोकन किया गया. जब-जब अभिभावक और ग्रामीण निःशुल्क जमीन निबंधन के लिए आवाज उठाते हैं तब भी अंचल कर्मी हरकत में आते हैं. फिर मामला शांत होते ही अंचल कर्मी भी शांत हो जाते हैं निःशुल्क निबंध की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चला जाता है . इन सब के बीच ग्रामीण अपनी बात पर अड़े हुए हैं या तो सरकार जमीन की रजिस्ट्री करवा ले या फिर निजी जमीन पर बना सरकारी विद्यालय को खाली कर दें. जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक विद्यालय पर तालाबंदी जारी रहेगा.








