गोरौल स्वतंत्रता सेनानी पंडित विन्ध्येश्वरी प्रसाद मिश्र की पांचवीं पूण्यतिथि उनकी पैतृक आवास सतपुरा गांव में मनाया गया. कार्यक्रम में शांतिपाठ और वेदपाठ के पश्चात उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन समर्पित किया गया. मौके पर उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी के बावजूद सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानीयों को दिए जाने वाले पेंशन और अन्य सुविधाएं नही लिए थे . इनकी धर्मपत्नी स्मृति शेष राजमणि देवी भी स्वतंत्रता सेनानी थी और उन्होंने भी अपने पति का अनुसरण करते हुए कोई भी सुविधा नहीं ली थी. वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के प्रचार-प्रसार में उनकी गहरी अभिरुचि थी. अपने पिता स्वर्गीय पं राम परीक्षण मिश्र द्वारा स्थापित जी ए उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भगवानपुर के सचिव पद पर रहते हुए उसे जिला के अग्रणी विधालय की पहचान दिलाई. बच्चियों की कठिनाई को देखते हुए पांच एकड़ जमीन दान देकर अपने माता-पिता के नाम पर श्री आर पी सी जे उच्च विद्यालय बेलबर घाट ( गोरौल) की स्थापना की जो अब इंटरस्तरीय हो चुका है. बुनियादी विद्यालय वारिसपुर एवं एल एन कॉलेज भगवानपुर की स्थापना में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इसके अलावा गांव के दो-दो मध्य विद्यालय के लिए भी जमीन दान में देने दिया . क्षेत्र के गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए वे उसे आर्थिक सहयोग देकर मदद करते थे. गोढ़ीया में आयुर्वेद अस्पताल खुलवाने में भी उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी. इनकी न्यायप्रियता को देखते हुए वैशाली जिला लोक अदालत का पहला अध्यक्ष बनाया गया था. कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए इन्हें ‘किसान श्री’ से सम्मानित किया गया था. इस क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक गतिविधियों में उनके द्वारा किया गया कृतित्व हमेशा याद किया जाएगा और नयी पीढ़ी को मार्ग दिखाने का काम करेगी.
उनके ज्येष्ठ पुत्र और राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन सहीत डॉ भूपेन्द्र प्रसाद मिश्र ‘भूपेश’, डॉ एस के तिवारी, डॉ वीणा तिवारी, डॉ गौतम जीतेन्द्र, कुमार मनीष, विभाकर चौबे, डॉ आनंद एवं डॉ यति तिवारी सहित अन्य लोगों ने पुष्प चढ़कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया. रिपोर्ट जाहिद वारसी








