गोरौल स्थित सैय्यद सम्हालू शाह रहमतुल्लाह अलैहे के मजार पर हर साल की तरह इस वर्ष भी सालाना उर्स धूमधाम और अकीदत के साथ मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह आयोजन क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश करता है, जिसमें दोनों समुदाय के लोग बराबर सहयोग करते हैं।
मजार कमेटी के सचिव इरसाद अहमद ने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। उर्स का मुख्य आयोजन 30 जनवरी, शुक्रवार से शुरू होगा।
कार्यक्रम का विवरण:
30 जनवरी (शुक्रवार): सुबह के वक्त कुरान ख्वानी का आयोजन किया जाएगा। वहीं, रात्रि में एक भव्य जलसे का प्रोग्राम रखा गया है, जिसमें बिहार के अन्य जिलों से आए नामचीन उलेमा और शोहरा (शायर) हिस्सा लेंगे और अपनी तकरीर व कलाम पेश करेंगे।
31 जनवरी (शनिवार): दूसरी रात, यानी शनिवार को रात्रि में एक शानदार कव्वाली मुकाबले/कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें वाराणसी की मशहूर कव्वाला सोनम परदेसी और जाने-माने कव्वाल दिलबर साबरी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के उमड़ने की संभावना है।
आयोजन समिति ने बताया कि इस पवित्र उर्स को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और दोनों समुदायों के लोगों द्वारा व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। यह मजार सदियों से गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक रहा है, जहां हर मजहब के लोग अपनी दुआएं लेकर आते हैं।
मुस्लिम एकता के बीच सजेगी महफिल, सोनम परदेसी और दिलबर साबरी बांधेंगे समां








