गोरौल (वैशाली): प्रखंड के लोदीपुर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोदीपुर में शिक्षा के क्षेत्र में एक सुखद बदलाव देखने को मिल रहा है। यहाँ शिक्षकों द्वारा अपनाई जा रही बाल केंद्रित शिक्षण विधि का सकारात्मक असर अब बच्चों के शैक्षणिक स्तर और उनके आत्मविश्वास पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बच्चे न केवल किताबी ज्ञान हासिल कर रहे हैं, बल्कि विज्ञान जैसे जटिल विषयों को प्रोजेक्ट के माध्यम से जीवंत कर रहे हैं।
माइक्रो इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट के तहत जाना अंतरिक्ष को
विज्ञान विषय में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) आधारित माइक्रो इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट-3.10 के अंतर्गत कक्षा 6 के छात्र-छात्राओं ने “अंतरिक्ष मिशन” विषय पर शानदार प्रोजेक्ट तैयार किया। बच्चों ने चार्ट पेपर, विभिन्न रंगों और प्लास्टिक की गेंदों का उपयोग कर बेहद आकर्षक ‘सौर परिवार’ का मॉडल बनाया।
मंगल पर जीवन की संभावनाओं पर प्रस्तुति
प्रोजेक्ट के दौरान बच्चों ने अंतरिक्ष मिशन के तहत मंगल ग्रह पर मिट्टी, जल, मौसम और वहाँ जीवन की संभावनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से कार्य किया। छात्र अभिषेक कुमार ने सौर मंडल की व्याख्या करते हुए पृथ्वी सहित सभी ग्रहों की सूर्य से दूरी के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। साथ ही, प्रस्तुति में विभिन्न देशों द्वारा मंगल ग्रह पर भेजे गए अंतरिक्ष अभियानों की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया।
“स्वयं करके सीखने” से बढ़ रहा कौशल
विज्ञान शिक्षक सुजीत कुमार की देखरेख में तैयार इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए प्रखंड नोडल शिक्षक प्रेम सिंह एवं विपिन कुमार ने कहा कि “इस विधि से बच्चे ‘स्वयं करके सीखते’ हैं। इससे न केवल उनकी विषय पर पकड़ मजबूत होती है, बल्कि समूह में प्रस्तुति देने से उनके बोलने के कौशल (Communication Skills) और नेतृत्व क्षमता का भी विकास होता है।”
इन नन्हे वैज्ञानिकों ने दिखाया दम
इस प्रोजेक्ट कार्य में कक्षा 6 के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से अभिषेक कुमार, आदित्य कुमार, सत्यम कुमार, दिव्या भारती, अंशिका कुमारी, अनुप्रिया और आकृति कुमारी शामिल थीं। स्कूल के इस प्रयास की स्थानीय अभिभावकों ने भी काफी प्रशंसा की है।








