गोरौल (वैशाली):
एक ओर जहाँ सरकार और प्रशासन ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने का दावा कर रही है, वहीं नगर पंचायत गोरौल के सफाईकर्मियों की लापरवाही ने इस अभियान की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। गोरौल थाने के ठीक सामने और चहारदीवारी के बगल में शौचालय की गंदगी और नालियों का गंदा पानी गिराए जाने से पूरा इलाका नरक में तब्दील हो गया है।
बीमारियों को न्यौता, राहगीर परेशान
नगर पंचायत की जिम्मेदारी पूरे क्षेत्र को स्वच्छ रखने की है, लेकिन यहाँ सफाई कर्मी ही महामारी फैलाने पर तुले हैं। स्थानीय राहगीरों—रघुनाथ महतो, मो. इसराइल, मो. लड्डू और मो. खलील ने बताया कि वर्तमान में रमजान का पावन महीना चल रहा है। पास में ही मस्जिद है जहाँ दर्जनों लोग नमाज अदा करने जाते हैं। रास्ते में फैली गंदगी और असहनीय बदबू के कारण नमाजियों और आम राहगीरों का वहां से गुजरना दूभर हो गया है। लोगों का कहना है कि विभाग शायद ‘तेल बचाने’ के लालच में गंदगी को दूर ले जाने के बजाय भीड़-भाड़ वाले इलाके में ही डंप कर रहा है।
ड्यूटी करना हुआ मुश्किल, पुलिसकर्मियों में आक्रोश
इस स्थिति से केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि कानून के रखवाले भी त्रस्त हैं। थाने में कार्यरत अवर निरीक्षक अशोक दुबे, हरेंद्र दास, रोहित कुमार और रवि कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने बताया कि दिन भर बदबू के बीच ड्यूटी करना मजबूरी बन गई है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर यही स्थिति रही तो थाने के कर्मी गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं। विरोध के बावजूद नगर पंचायत के कर्मी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं।
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत की स्वच्छता पदाधिकारी साक्षी कुमारी ने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि “शौचालय सफाई के बाद कचरा कहाँ गिराना है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है,” हालांकि उन्होंने कर्मियों से पूछताछ करने की बात कही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग के उच्चाधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है या लोग यूँ ही इस गंदगी और बदबू के साये में रहने को मजबूर रहेंगे।








