भगवानपुर प्रखंड के सतपुरा गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय पं विन्देश्वरी प्रसाद मिश्र की तृतीय पुण्य तिथि उनके पैतृक गांव सतपुरा में मनाई गई ।


गोरौल वैशाली जाहिद वारसी की रिपोर्ट ।
इस अवसर पर शांति पाठ एवं धर्मग्रंथों के पाठ के साथ ही पं. मिश्र के पुत्र और राजद प्रदेश प्रवक्ता सह बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सदस्य श्री चित्तरंजन गगन की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा एवं गरीब असहायों के बीच कम्बल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें वक्ताओं ने पं. मिश्र के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला । वक्ताओं ने कहा कि इस क्षेत्र में शिक्षा के विकास में पं. मिश्र का बहोत बड़ा योगदान रहा है।
वर्षों तक वे अपने पिता द्वारा स्थापित जीए उच्चतर हाई स्कूल भगवानपुर के सचिव रहे|
उन्होंने शिक्षा के लिए पांच एकड़ भूमि देकर अपने पिता और माता जी के नाम पर श्री रामपरिक्षण चन्द्रज्योती उच्च विद्यालय बेलबर घाट जो की अब इन्टरस्तरिय हो गया है कि स्थापना भी की।
इसके अलावा अपने गांव में दो-दो मध्य विद्यालयों के भवन निर्माण हेतु भुमि दान किया।
इसके साथ हीं एलएन कॉलेज भगवानपुर एवं बुनियादी विद्यालय वारिसपुर की स्थापना में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान था। क्षेत्र के गरीब परिवार से आने वाले मेधावी छात्रों को हर प्रकार से सहयोग कर उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए प्रेरित किया जो विभिन्न सेवाओं में उच्च पदों पर गए। वक्ताओं ने कहा कि इनकी न्यायिक निष्पक्षता के कारण ही वैशाली जिला में गठित लोक अदालत का इन्हें पहला अध्यक्ष बनाया गया था। वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ावा देने के कारण अनेकों बार पुरस्कृत होने वाले वाले पं. मिश्र को राज्य सरकार द्वारा “किसान श्री” के सम्मान से सम्मानित किया गया था। वक्ताओं ने कहा कि इनके सामाजिक एवं धार्मिक उपलब्धियों को भूलाया नहीं जा सकता।
कई धार्मिक किर्तिमान इनके धार्मिक आस्था के उदाहरण हैं।
वह काफी दिनों तक सामाजिक संगठन ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष भी रहे थे ।
पति-पत्नी दोनों स्वतंत्रता सेनानी होने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानी को मिलने वाली पेंशन और अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से उन्होंने इन्कार कर दिया था।
इस अवसर पर शैलेश कुमार पाण्डेय, डॉ सतीश कुमार तिवारी, प्रो.भूपेन्द्र प्र. मिश्र , डॉ जीतेन्द्र, डॉ वीणा तिवारी, कुमार मणीष , डॉ यति तिवारी, त्रृषभ गगन , मेजर शिखर गगन एवं परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हीं बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग शामिल थे।







