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17 वर्षों का संघर्ष: तालीमी मरकज़ और टोला सेवकों के भविष्य पर अब ‘समीक्षा’ नहीं ‘ठोस नीति’ की दरकार।

पटना | 14 जुलाई 2026* बिहार सरकार द्वारा तालीमी मरकज़ और टोला सेवकों की सेवा शर्तों व भविष्य को लेकर की जा रही समीक्षा का ऑल इंडिया तंजीम-ए-इंसाफ ने स्वागत किया है। संगठन के बिहार उप महासचिव गुलाम सरवर आज़ाद ने स्पष्ट किया कि अब केवल बैठकों का नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस व ऐतिहासिक निर्णय लेने का समय है।
*योगदान को मिली वैश्विक सराहना* श्री आज़ाद ने कहा कि ये शिक्षा सेवक पिछले 17 वर्षों से राज्य के अति-पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में रीढ़ की हड्डी साबित हुए हैं। जन-कल्याणकारी योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में इनके इसी योगदान को *यूनिसेफ (UNICEF)और ज्वाइंट रिव्यू मिशन* जैसी प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भी सराहा है।
*’मार्गदर्शिका 2018′ में संशोधन की मांग* तंजीम-ए-इंसाफ ने कर्मियों के हो रहे शोषण और प्रशासनिक मनमानी पर चिंता जताते हुए ‘मार्गदर्शिका 2018’ में तत्काल मूलभूत संशोधन की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे व्यावहारिक और कर्मी-अनुकूल बनाना बेहद ज़रूरी है ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के कार्य कर सकें।
*संगठन की 5 प्रमुख मांगें:* सेवा का स्थायीकरण एवं भविष्य की गारंटी, महंगाई के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय, लंबे समय से बकाया वेतन का शीघ्र भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, अधिकारों व आत्मसम्मान की रक्षा
                       बयान के अंत में उन्होंने जो़र देकर कहा कि यह मामला केवल कुछ हज़ार कर्मियों की आजीविका का नहीं, बल्कि बिहार के लाखों गरीब और शोषित बच्चों के भविष्य का है। संगठन ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार से उम्मीद जताई है कि वे केवल समीक्षा तक सीमित न रहकर जल्द ही एक ऐतिहासिक व कल्याणकारी नीति की घोषणा करेंगे। रिपोर्ट जाहिद वारसी

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Author: bharatdarshan24

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