गोरौल (वैशाली)। बिहार के वैशाली जिले के गोरौल इंडस्ट्रियल एरिया से एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ स्थित ‘मां भवानी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड’ नामक फैक्ट्री पर स्थानीय ग्रामीणों ने रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाने का संगीन आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले धुएं और दूषित वेस्ट के कारण आसपास के गांवों में गंभीर बीमारियां पैर पसार रही हैं। इस विकट स्थिति से त्रस्त होकर स्थानीय लोगों ने वैशाली जिला प्रशासन और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से फैक्ट्री की जांच करने तथा इस पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।चिमनियों से उगला जा रहा जहरीला धुआंस्थानीय निवासियों का आरोप है कि दिन के समय फैक्ट्री में प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन करने का दिखावा किया जाता है। लेकिन, जैसे ही रात का अंधेरा होता है, फैक्ट्री प्रबंधन की मनमानी शुरू हो जाती है। रात के वक्त फैक्ट्री की चिमनियों से भारी मात्रा में दमघोंटू और जहरीला धुआं छोड़ा जाता है। इसके कारण पूरे इलाके की हवा दूषित हो चुकी है और सुबह के समय लोगों का सांस लेना भी दूभर हो जाता है।गांवों में बढ़े सांस और त्वचा के मरीजफैक्ट्री से लगातार हो रहे इस अवैध उत्सर्जन का सीधा और घातक असर अब निर्दोष ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। आसपास के गांवों में सांस लेने में तकलीफ, दमा, आंखों में तेज जलन, खांसी और त्वचा रोग (स्किन एलर्जी) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस जानलेवा प्रदूषण को तुरंत नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में यह इलाका किसी बड़ी स्वास्थ्य त्रासदी का शिकार हो सकता है।आंदोलन की राह पर ग्रामीणऔद्योगिक क्षेत्र के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाए जाने से स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर वैशाली जिला प्रशासन से मांग की है कि एक विशेष टीम का गठन कर रात के समय फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया जाए और दोषी पाए जाने पर फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द करते हुए प्रबंधन पर कानूनी मुकदमा दर्ज हो। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे औद्योगिक क्षेत्र के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।








