गोरौल (वैशाली)। प्रखंड क्षेत्र के बेलवरघाट स्थित सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) आरपीसीजे उच्च माध्यमिक विद्यालय में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के दूसरे दिन देशभक्ति का माहौल रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों द्वारा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया गया। इसके साथ ही उपस्थित लोगों के बीच राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान के महत्व और इसके गौरवशाली इतिहास पर विशेष रूप से चर्चा की गई।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता व शिक्षक उमेश कुमार प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ भारत की स्वतंत्रता, अखंडता, एकता और अस्मिता के महान प्रतीक हैं। राष्ट्रगान जहाँ पूरे देश के गौरव का गान है, वहीं राष्ट्रीय गीत ने देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों के भीतर देशभक्ति का नया जोश भरा था। भारतीय लोकतंत्र में दोनों को ही अपना ऐतिहासिक और संवैधानिक सम्मान प्राप्त है।उन्होंने बच्चों को जानकारी देते हुए बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रगान की रचना की थी, जिसे सबसे पहले 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। बाद में संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को ‘जन गण मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। यह देश की संप्रभुता का प्रतीक है। इसके गायन की कुल अवधि 52 सेकंड निर्धारित है और इसे सम्मान देने के लिए गाते या बजाते समय सभी को सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य है।राष्ट्रीय गीत के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय हैं। उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में साल 1882 में इसे शामिल किया गया था, जिसे बाद में 1896 के कांग्रेस कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वर दिया था। स्वतंत्रता संग्राम में इसके अतुलनीय योगदान के कारण इसे राष्ट्रगान के बराबर का दर्जा और सम्मान प्राप्त है। इस गरिमामयी अवसर पर स्कूल के शिक्षक कुमार चंदन, सीमा कुमारी, नीतू कुमारी, शिवानी, दिनेश कुमार, पंकज कुमार और लिपिक मोहन सिंह सहित कई अन्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।








