गोरौल। प्रखंड सभागार में आयोजित कृषि उर्वरक निगरानी समिति की बैठक बेहद हंगामेदार रही। बैठक में उपस्थित लोगों और समिति के सदस्यों ने किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। सदस्यों ने आरोप लगाया कि बैठक के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और धरातल पर किसानों के हित में कोई काम नहीं हो रहा है।यूरिया की कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री बैठक में मौजूद निगरानी समिति के सदस्य शिवजी पटेल ने अधिकारियों को घेरते हुए कहा कि प्रखंड में खाद की भारी कालाबाजारी चल रही है। किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर उर्वरक नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ₹266 में मिलने वाली यूरिया खाद को खुलेआम ₹300 से ₹350 प्रति बोरी तक बेचा जा रहा है। बिचौलिए और कालाबाजारी करने वाले लोग किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं, जबकि आम किसान खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।उर्वरक निरीक्षक की अनुपस्थिति में फर्जी हस्ताक्षर का आरोपश्री पटेल ने बैठक की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण बैठक से सभी उर्वरक निरीक्षक (फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर) नदारद थे। इसके बावजूद, प्रखंड के आला अधिकारियों की मौजूदगी में उपस्थिति पंजी (रजिस्टर) पर उर्वरक निरीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने इस लापरवाही और मिलीभगत पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आज प्रखंड में किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूदहंगामे और तीखी बहस के बीच आयोजित इस बैठक में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) पंकज कुमार निगम, अंचलाधिकारी (सीओ) सीमा रंजन, प्रखंड कृषि पदाधिकारी शिवजी पासवान और सुबोध कुमार सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि व समिति के सदस्य उपस्थित थे। किसानों से जुड़े इस गंभीर मुद्दे और फर्जी हस्ताक्षर के आरोपों के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।








