गोरौल वैशाली जाहिद वारसी की रिपोर्ट।
अलविदा जुमा की नमाज पढ़ी गई।
इस्लाम धर्म में सबसे पाक महीना रमजान माह को माना गया है, इस माह में सभी मुसलमान रोजा (उपवास) रखते हैं, और अल्लाह की इबादत करते हैं, रमजान के महीने में रोजे का महत्व इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि इस महीने में की गई इबादत का शबाब कई गुना अधिक मिलता है, रमजान माह में पड़ने वाले आखिरी जुमे को अलविदा जुमा का नमाज अदा किया जाता है, जो 5 अप्रैल 2024 शुक्रवार को अलविदा का नमाज पढा गया, रमजान के आखरी दिन ईद की नमाज अदा की जाती है , ईद की नमाज पढ़ने से पहले घर के प्रति व्यक्ति के नाम से फिरता का पैसा गरीबों को देना है तभी ईद की नमाज होगी फिरता का पैसा ढाई किलो ग्राम गेंहू का पैसा जोर कर बाजार के दाम से देना है जो अपने अपने क्षेत्र के दाम के हिसाब से , वहीं जाकात भी दिया जाता है अपने सम्पत्ति का ढाई परसेंट जोर कर चाहे जेवर हो, जमीन जायदाद, गाड़ी बाड़ी दुकान इत्यादि का जोर कर देते हैं , गरीबों को कपड़ा भी दान करते हैं, वहीं ईद के दिन सभी मुसलमान भाई नहाकर पाक साफ होकर नए नए कपड़े पहन कर ईदगाह या मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं एवं एक दूसरे से आपसी रंजिश को मिटाकर गले मिलते हैं, क्षेत्र के गोरौल, हरशेर, इनायत नगर , सोंधो, हुसैना, रसुलपुर कोड़ी गांव, इस्लाम पुर सहित अन्य सभी मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज पढ़ी गई,








