वैशाली विधान सभा क्षेत्र में प्रथम चरण चुनाव बीते 6 नवम्बर
को चुनाव सम्पन्न हो गई। चुनाव सम्पन्न होने के बाद भी लोगो द्वारा कि जा रही चर्चाओं में कोई कमी नही आई है। अभी भी नेताओ के समर्थक मतदाताओ की नब्ज टटोलने में लगे है। पहले चुनाव में समस्या के अलावे कौन अच्छा है कौन उम्मीदवार खराब है को लेकर हर गांव हर बाजारों के साथ साथ चाय के दुकानों पर भी चर्चा होती रहती है। अब जीत हार को लेकर चर्चा की जा रही है। कुछ लोग देश हित मे वोट देने की बात कहते है तो कोई अच्छे उम्मीदवारों को मत देने की बात करते नजर आ रहे है। गांव के छुटभैये नेता अपने अपने उम्मीदवार की जीत पक्की बता रहे है तो कुछ लोग जातीय समीकरण बैठाकर महागठबंधन उम्मीदवार अजय कुशवाहा की जीत पक्की मान रहे है तो कुछ लोग गुणा भाग कर एनडीए उम्मीदवार सिद्धार्थ पटेल की जीत पक्की मान रहे है. वही कुछ लोग कांग्रेस उम्मीदवार ई संजीव कुमार की भी इस चुनाव में बाजी मारने के दावे कर रहे है।
निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में डटे पूर्व मंत्री और इस क्षेत्र से छः वार विधायक रह चुके वृशिण पटेल के समर्थक भी अपनी जीत पक्की बता रहे है। चाय एवं पान के दुकान पर चुनावी हो रही हैं
। सभी नेताओं द्वारा अपने अपने नेता की जीत का दावे किया जा रहा है तो कोई मोदी रूपी नैया पर बैठ चुनाव जितने का दावा कर रहे है। वही कुछ लोग अपने स्वजातीय के उमीदवार की जीत पक्की मान रहे है। कोई बिहार के हित की बात एवं आम जनता की सुरक्षा वो विकास के मुद्दे पर वोट पड़ने का दावा कर रहा है तो कोई महिलाओ की उन्नति पर वोट मिलने की बात कर रहै है। सभी उम्मीदवारों के समर्थक अभी से ही मिठाई खिलाने, पार्टी देने पूजा पाठ करने की बात कर रहे है। वही वहीं कुछ ग्रामीण बता रहे थे कि कुछ लोगों ने नोटा पर भी वोट देकर सभी उम्मीदवारों को खारिज कर दिया है। कई नेता जिनको कुछ हाथ नही लगा वे भी बुझे मन से ही सही लेकिन अपने उम्मीदवारों के जीत पक्की बता रहे हैं। वही कुछ एसे भी लोग है जो उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र से काफी वोट दिलाने का दावा कर चुके है उनके चेहरे मुरझाये हुए है। मतगणना के दिन उनकी पोल पट्टी खुलने वाली है। मतदाता अभी भी चुप्पी साधे हुए है । कुछ बोल नही रहे है, जिस किसी पार्टी के नेता पूछते है कि वोट हमारे नेताजी को दिए है न इसके जवाब में मतदाता केवल सिर हिलाकर हामी भरते नजर आ रहे है। यह शिलशिला लगातार चलता रहता है. हर कोई मतगणना से पहले ही अपनी गणना बैठाकर अपने उम्मीदवारों को जीतने का दावा कर रहे है। देखना यह है कि आगामी 14 नवम्बर को किसके सर पर ताज चढ़ता है और किसके सर से ताज उतरता है। अभी तो सभी उम्मीदवार के लोग पक्की जीत के दावे के अलावे अपनी अपनी डफली अपनी राग अलापने में लगे है। एक दिन बाद परिणाम आना है, वैसे बरबोले समर्थको की नींद हराम है। वहीं कुछ लोग सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं तो कुछ नितिश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाह रहे हैं, चुनाव परिणाम से पहले समर्थकों के दिलों कि धड़कन तेज है कौन । किसकी नैया डूबी किसका पार लगा ये तो 14 तारीख चुनाव परिणाम आने के बाद पता चलेगा । रिपोर्ट जाहिद वारसी








